जब ढाई महीने तक Wasim Akram को जबरदस्ती कैद में रखा गया, खिलाड़ी ने बताई अपनी दर्द भरी दास्तां

Wasim Akram

जब ढाई महीने तक Wasim Akram को जबरदस्ती कैद में रखा गया, खिलाड़ी ने बताई अपनी दर्द भरी दास्तां

पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी वसीम अकरम (Wasim Akram) से जुड़ा कई ऐसा किस्सा है जिससे आज कई लोग अनजान है. उन्होंने अपनी आत्मकथा सुल्तान: ए मेमाँयर में इस बात का साफ तौर पर खुलासा किया कि किस प्रकार क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद उन्हें कोकिन की लत लग गई थी. इतना ही नहीं उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि किस प्रकार उनके अंदर यह लत विकसित हुई और जीवन में उन्हें इस वजह से क्या- क्या परेशानियां झेलनी पड़ी, वह कई लोगों को शायद पता नहीं है. यह तब की बात है जब वसीम अकरम (Wasim Akram) के दो छोटे बच्चे थे और उनकी पहली पत्नी का निधन हो गया था.

जबरदस्ती ढाई महीने तक रिहैब के लिए रखा

अपनी आत्मकथा में वसीम अकरम (Wasim Akram) ने इस बात का खुलासा किया कि किस तरह उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध ढाई महीने तक पाकिस्तान मे रिहैब में रखा गया था. वसीम अकरम ने आगे बताया कि धीरे-धीरे मेरी नशे की लत और भी ज्यादा बद से बदतर होती गई जिसके बाद मैं रिहैब सेंटर के लिए चला गया लेकिन मुझे वहां ढाई महीने तक मेरी मर्जी के खिलाफ रखा गया. जाहिर है यह दुनिया में अवैध है लेकिन पाकिस्तान में नहीं. इससे मुझे मदद नहीं मिली. जब मैं बाहर आया तो मेरे अंदर एक विद्रोह आ गया था.

Wasim Akram ने बताई पाकिस्तान की कहानी

वसीम अकरम (Wasim Akram) ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जिस तरह हम वेस्टर्न फिल्मों में देखते हैं कि रिहैब में सुंदर बड़े लाँन होते हैं और लोग लेक्चर देते हैं और जिम जाते हैं लेकिन मैं पाकिस्तान में जहां रिहैब के लिए था, वहां एक गलियारा और 8 कमरे थे बस ये मेरे लिए बहुत कठिन था और वह समय किसी भयानक पल से कम नहीं था जिसके बाद वसीम अकरम (Wasim Akram) की पत्नी का देहांत हो गया और उन्हें इस बात का अंदाजा था कि वह गलत रास्ते पर हैं लेकिन वह अपने आप को रोक नहीं पाए.

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वह बताते हैं कि मैं पूरे 2 साल के लिए कहीं खो गया था और इस दौरान मुझे बिल्कुल भी नहीं पता चला कि मेरे आस-पास और मेरे साथ क्या हो रहा है.

बुरी हो गई थी स्थिति

वसीम अकरम (Wasim Akram) ने बताया कि मेरी पत्नी का जब देहांत हुआ तब मुझे इस बात की जानकारी थी कि मैं गलत रास्ते पर हूं और मैं इससे बाहर निकलना चाहता था क्योंकि उस वक्त मेरे पास 2 जवान लड़के थे और मुझे उनकी जिम्मेदारी उठानी थी. एक दूसरे पिता की तरह अपने बच्चे को पालने में उन्हें सुबह उठकर स्कूल छोड़ने और कपड़े बदलने में जो योगदान होता है, वह मैं कभी नहीं कर पाया. मैं कहीं खो गया पर मुझे यह तक नहीं पता था कि मेरे बच्चों ने क्या खाया और वह क्या कर रहे हैं.

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